जिंदगी बीत जाती है किसी अच्छे दिन की तलाश में

Updated: 4 days ago

वर्ल्ड बैंक की 2015 की गाइडलाइन के अनुसार भारत में 21.2 % लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। और आज जहाँ काम बंद हैं, आर्थिक व्यवस्था अपने नीचले दौर से गुज़र रही है, कई रिपोर्ट ऐसी भी हैं जहाँ ये दावा किया जाता है कि 2021 तक लगभग 40% आबादी गरीबी रेखा से नीचे होने की कगार पर है।


29 जुलाई 2020 को भारत सरकार की नयी शिक्षा नीति को कैबिनेट से मंज़ूरी मिल गयी, कई मीडिया चैनलों ने इसे विदेशो को टक्कर देने वाली बताया है और कई ने तो इसे दुनिया की सबसे अच्छी नीति भी करार कर दिया है।


पर इसी बीच एक और खबर आती है, जहाँ लॉकडाउन के चलते स्कूल और मध्यान भोजन बंद होने के चलते झुग्गी में रहने वाले बच्चो को ज़िंदा रहने के लिए कचरा बीनने पर मजबूर कर दिया है।


14 साल के सुमित अहिरवार गर्व के साथ कहता है की स्कूल में पढ़ाई गयी चीज़े उसे कचरे का सही दाम लगाने में मदद देती है। उसे 200 तक की गिनती भी आती है।

दिन में 100 - 150 तक कमाने वाले ये बच्चे छोटी उम्र में ही जिंदगी से लड़ाई में लगे हुए है, और सरकार की योजनाए इनके लिए केवल मुंगेरीलाल के हसीन सपने की तरह है।


योजनाए बनायीं जाती है पर वो कागज़ों से नीचे नहीं उतर पाती है और जिंदगी बीत जाती है किसी अच्छे दिन की तलाश में।


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