30 साल तक 15 किलोमीटर पैदल चलकर पंहुचाई चिट्ठियां

Updated: Jul 18

सोशल मीडिया और ईमेल के ज़माने में कौन चिट्ठी लिखता होगा या भेजता होगा , पर आज भी कई ऐसी जगह है जहां पर चिट्ठियों से प्यार और खैरियत भेजी जाती है।



फेसबुक, ट्विटर, स्नैपचैट के ज़रिए आज तो कोई भी संदेश पल भर में किसी भी फॉर्मेट में किसी के पास भी पंहुच सकता है तो क्या उस जगह पर कोई ऐसा होगा जो सालों से लोगों के ख़तो को पहुंचाने का काम कर रहा हो?


कौन आज के ज़माने में चिट्ठी लिखता होगा या भेजता होगा , पर आज भी कई ऐसी जगह है जहां पर चिट्ठियों से प्यार और खैरियत भेजी जाती है।


तमिलनाडु का कूनूर ज़िला ऐसी ही जगहों में से एक है , और इसी जिले में डी. सिवान नाम से एक पोस्टमैन हैं जो 30 साल से लोगो के लिए चिट्ठियां और पेंशन लेकर जा रहे है।

वे रोज़ 15 किलोमीटर चलते थे।



इससे पहले की आप लोग इसे मामूली काम करार दे दें, मैं आपको कूनूर जिले का थोड़ा परिचय दे देता हूँ।


यह ज़िला पहाड़ों और जंगलों से घिरा हुआ है जहाँ हर पर जंगली जानवर का ख़तरा बना रहता है। आईएएस ऑफिसर सुप्रिया साहू ने 8 जुलाई को ट्वीट करके बताया की डी सिवान जी को कई बार इन खतरनाक जानवरों का सामना करना पड़ चुका है।




पथरीले रास्तों से गुजरते हुए कई बार उनका सामना जहरीले साँपों से हुआ है। गीले रास्तों में फिसलने का डर होता था। एक बार तो उनके पीछे हाथियों का एक झुण्ड पड गया था, पर इसके बावजूद उनका हौसला कभी डगमगाया नहीं।



वे ईमानदारी से अपना काम करने में लगे रहे और पिछले हफ्ते ही वे अपनी सेवा से निवृत्त हुए।

यक़ीनन ये कहानी हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। आज जहाँ लोग पैसे के पीछे पागल है वही एक व्यक्ति कम पगार में अपनी जान की परवाह किये बिना ईमानदारी से देश बनाने में लगा हुआ है।



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